मेरे को जैसे याद आता है में लिखता हुआ | मुझे अच्छी तरह से समय याद नहीं है, शायद २०२२ की बात है, महाराष्ट्र के पुणे शहर के मेरे क्लाइंट थे | जिनका नाम मनीषा था , उन्होंने Instagram सम्पर्क किया |
अब आप ध्यान सुने, उनकी सच्ची कहानी, उनके साथ ये हुआ की, वो एक तलाक सुधा औरत थी, तो उनकी शादी दोबारा कराई, तलाक सुधा व्यक्ति के साथ, कुछ समय निकलने के बाद पता चला की उनका तो तलाक़ हुआ ही नहीं था |
उसके पति का नाम रमेश था, उसकी पहेली पत्नी किसी और के साथ भाग गई थी, पर उनका तलाक़ नहीं हुआ, रमेश ने २-३ साल उसका इंतज़ार किया पर वो आई नहीं | उसको तलाश किया और तो और पुलिस शिकायत भी की फिर भी वो नहीं मिली |
मेरे क्लाइंट मनीषा को ये बात पता चली तो उसने दिमाग में नहीं लिया था | थोड़ा समय गुजरा वो प्रेगनेंट हुई, अब उस दौरान रमेश की पहेली पत्नी वापस आ गई, और पता नहीं उसने किया जादू किया रमेश पर और उसकी परिवार पर की सब उसकी तरफ हो गए और मेने क्लाइंट मनीषा को सबने मिलके घर से ढके मारकर भार निकाल दिया | उस दौरान वो प्रेग्नेंट थी | फिर वो अपने माँ के घरपे रहने लगी ,मेने उनकी पूरी कहानी सुनी, कुछ समय बाद उसके एक लड़की हुई, जब लड़की की उम्र २ साल थी तब उन्होंने मेरे से सम्पर्क किया |
उस दौरान उन्होंने मेरे को काम दिया, में खुद इनसे मिलने गया २-३ बार | जब मेने इनका काम किया था न तब इनके काम बहुत समस्या थी, रमेश की पहले पत्नी ने बहुत कुछ उल्टा-सीधा, मंत्र -तंत्र का सहारा लेकर सबको अपनी तरफ कर लिया | में जैसे-जैसे आगे बड़ा, तो सबसे पहले मुझे सफलता ये मिली की मेरे क्लाइंट मनीषा को उसके पति ने वापस बुला लिया, पर साथ नहीं रहते थे , उसको एक अलग से घर किराए पर दिला दिया, जब उसका मन होता था तब अपनी बेटी से मिलने आता था | जैसे-जैसे काम आगे बड़ा, रमेश की पहेली पत्नी को घर से भार निकलवा दिया, और मनीषा को उसके हक़ का जो था उसको दिलाया | असली समस्या तो अब आई, रमेश की पहेली पत्नी ने इतनी आसानी से पीछा नहीं छोड़ा, वो रमेश को धमकाने लगी, की मुझे सारी प्रॉपर्टी चाहिए, पैसा सब चहिये | इतना दुःख झेलने के बाद भी मनीषा ने उसको हक़ जो था वो दिया | फिर हमने अंत में एक बहुत बड़ी विधि करके इस काम को अंत तक पहुंचाया | आज मेरे वो क्लाइंट अपने परिवार के साथ बहुत खुश है |
किसी भी काम को अंत तक पहुंचाने के लिए जितनी महेनत हम करते है उतना कोई नहीं करता | काम अंत तक तपहुँचता है जब क्लाइंट बात माने और हमारा साथ पूरा दे तब जाकर समफलता मिलती है |
ये कहानी १००% सच्ची है, सिर्फ नाम बदल दिए है | मेरे को लिखना तो इतना अच्छी तरहा से नहीं आता | और भी मेरे पास सच्चा अनुभव है | इस काम को करने में हमे बहुत समय लगा, और बहुत पैसा खर्च हुआ, बहुत अलग-अलग तरह की विधि, तंत्र-मंत्र, और योग साधना, अगोरी क्रिया, इत्यादि क्रिया को सहारा लेना पड़ा ,तब जाके सफलता मिली |
ये कहानी २०२३ की थी | और मेरे जीवन का सबसे अच्छा अनुभव भी है | मेरे क्लाइंट का नाम सुथार मुकेश भाई था, कहानी इनके पत्नी और इनके एक सामन्य दोस्त की है | मुकेश के ४ बचे थे, ३ लड़किया और १ लड़का | मुकेश के दोस्त का नाम पटेल संदीप था और मुकेश की पत्नी का नाम रचना था | संदीप मुकेश के घर आने जाने लगा, और उसके साथ काम करता था, वो दोनों थे तो एक ही गांव के, काम भी साथ करते थे, मुकेश की उसके साथ नार्मल दोस्ती थी, जैसे उसके घर आना जाना लगा रहता था, तो रमेश की पत्नी रचना की उसके साथ दोस्ती हो गई। ............................... आगे की कहानी के लिए इंतज़ार करे। ..................................







